उत्तर :
- “जल है तो जीवन”
- जल बिना पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की नहीं जा सकती।
- जल संसाधन का दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
- जल संसाधन के उपयोग की सूची लंबी है।
- समग्र सजीव सृष्टि भी जीवन टिकाए रखने के लिए जल का ही उपयोग करती है।
- किसी भी देश का विकास उसकी कृषि एवं उसमें उपयोग किए जाने वाले जल पर है।
- जल की विशेष आवश्यकता पीने में, घरेलू कार्यों में एवं उद्योगों में रहती है।
- बढ़ती जनसंख्या एवं विकास कार्यों में जिस तेजी से जल राशि का उपयोग हो रहा है, उसी तरह जल की तंगी खड़ी होती जा रही है।
- जल का ध्यान रखकर इसका विवेक पूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
- जल मर्यादित संसाधन है।
- जल के स्थान पर अन्य कोई संसाधन लिया नहीं जा सकता।
- जल के कारण ही पर्यावरण जीवंत है।
- जल जीवन का अभिन्न अंग है।
2. जल स्त्रोत का परिचय दीजिए।
उत्तर :
- जल स्त्रोत के मुख तीन प्रकार है।
1. वृष्टि जल
2. भूपृष्ठ जल
3. भूमिगत जल
(1) वृष्टि जल :
- पृथ्वी पर जल संसाधन का मूल स्त्रोत ‘वृष्टि’ है।
- जैसे की नदी, सरोवर, झरने और कुएं ये गौण स्त्रोत है। ये सभी स्त्रोत वृष्टि के आभारी है।
(2) भूपृष्ठ :
- पृथ्वी की सतह का जल नदी, सरोवर, तालाब, समुद्र, झरनों वगैरह के रूप में दिखाई देता है, यह भूपृष्ठ जल है।
(3) भूमिगत जल :
- मुख्य जल स्त्रोतों में भूमिगत जल का स्थान महत्वपूर्ण है।
- भूपृष्ठीय जल के अवशोषण से भूमिगत जल प्राप्त होता है।
- भूमिगत जल राशि अमर्यादित है।
- भारत में उत्तर के मैदानी क्षेत्रों में 42% भूमिगत जल पाया जाता है।
- दक्षिण भारत के पठारी प्रदेश एवं पर्वतीय क्षेत्रों के कारण भूमिगत जल का प्रमाण कम मिलता है।
- भूमिगत जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई के लिए हॉता है।
- जल बिना पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की नहीं जा सकती।
- जल संसाधन का दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
- जल संसाधन के उपयोग की सूची लंबी है।
- समग्र सजीव सृष्टि भी जीवन टिकाए रखने के लिए जल का ही उपयोग करती है।
- किसी भी देश का विकास उसकी कृषि एवं उसमें उपयोग किए जाने वाले जल पर है।
- जल की विशेष आवश्यकता पीने में, घरेलू कार्यों में एवं उद्योगों में रहती है।
- बढ़ती जनसंख्या एवं विकास कार्यों में जिस तेजी से जल राशि का उपयोग हो रहा है, उसी तरह जल की तंगी खड़ी होती जा रही है।
- जल का ध्यान रखकर इसका विवेक पूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
- जल मर्यादित संसाधन है।
- जल के स्थान पर अन्य कोई संसाधन लिया नहीं जा सकता।
- जल के कारण ही पर्यावरण जीवंत है।
- जल जीवन का अभिन्न अंग है।
2. जल स्त्रोत का परिचय दीजिए।
उत्तर :
- जल स्त्रोत के मुख तीन प्रकार है।
1. वृष्टि जल
2. भूपृष्ठ जल
3. भूमिगत जल
(1) वृष्टि जल :
- पृथ्वी पर जल संसाधन का मूल स्त्रोत ‘वृष्टि’ है।
- जैसे की नदी, सरोवर, झरने और कुएं ये गौण स्त्रोत है। ये सभी स्त्रोत वृष्टि के आभारी है।
(2) भूपृष्ठ :
- पृथ्वी की सतह का जल नदी, सरोवर, तालाब, समुद्र, झरनों वगैरह के रूप में दिखाई देता है, यह भूपृष्ठ जल है।
(3) भूमिगत जल :
- मुख्य जल स्त्रोतों में भूमिगत जल का स्थान महत्वपूर्ण है।
- भूपृष्ठीय जल के अवशोषण से भूमिगत जल प्राप्त होता है।
- भूमिगत जल राशि अमर्यादित है।
- भारत में उत्तर के मैदानी क्षेत्रों में 42% भूमिगत जल पाया जाता है।
- दक्षिण भारत के पठारी प्रदेश एवं पर्वतीय क्षेत्रों के कारण भूमिगत जल का प्रमाण कम मिलता है।
- भूमिगत जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई के लिए हॉता है।
3. जल संसाधन का उपयोग समझाइए।
उत्तर :
- जल संसाधन का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है।
- भारत में लगभग 84% जल सिंचाई के लिए उपयोगी है। उदाहरण स्वरूप एक कि.ग्रा. गेंहू उत्पन्न करने के लिए लगभग 1500 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
- धान, पटसन एवं गन्ना की फसलों को अधिक जल की आवश्यकता होती है।
- प्राचीन समय से ही पानी का उपयोग सिंचाई के लिए होता है।
- कावेरी नदी में से ‘ग्रांड एनिकट’ नाम से प्रसिध्द नहर का निर्माण दूसरी सदी में हुआ था।
- 1882 में उत्तरप्रदेश की पूर्वीय यमुना नहर का निर्माण किया गया था।
- भारत में सिंचाई के मुख्य तीन माध्यम है।
1. कुआँ एवं ट्यूबवेल
2. नहर और
3. तालाब
- इन में कुआँ एवं ट्यूबवेल सिंचाई के मुख्य माध्यम है।
- नहर एवं तालाब क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर आते है।
- नहरों द्वारा सतलज, यमुना एवं गंगा के विशाल मैदानों तथा पूर्व के तटीय मैदानों में स्थित महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी के मुख त्रिकोण प्रदेशों में होती है।
- कुआँ एवं ट्यूबवेल कांप के मैदानों में सामान्य है।
- तालाबों द्वारा होने वाली सिंचाई पूर्व एवं दक्षिण के राज्यों में अधिक है।
4. बहुउद्देशीय योजना की समझ दीजिए।
उत्तर :
- भारत में अनेक छोटी बड़ी नदियां बहती है ।
- भारत का जल परिवाह विशाल है ।
- इसका कारण भारत का भूपृष्ठ ऐसा है की अनेक नदियां दूसरी नदियों से मिलकर उसका पानी समुद्र में ले जाती है ।
- इस जल का उपयोग अनेक उद्देश्यों के लिए हो, इसलिए कई नदियों पर बहुउद्देशीय योजनाएं बनाई गई है ।
- बहूद्देशीय अर्थात नदी-घाटियों के साथ जुड़ी विभिन्न समस्याओं को हल करना ।
- इस में बाढ़-नियंत्रण, जमीन कटाव को रोकना, सिंचाई एवं पेयजल, उद्योग, बस्तियों को दिया जानेवाला पानी, बिजली उत्पादन, आंतरिक जल परिवहन, मनोरंजन, वन्यजीव संरक्षण एवं मत्स्य पालन के विकास का समावेश होता है ।
उत्तर :
- जल संसाधन का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है।
- भारत में लगभग 84% जल सिंचाई के लिए उपयोगी है। उदाहरण स्वरूप एक कि.ग्रा. गेंहू उत्पन्न करने के लिए लगभग 1500 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
- धान, पटसन एवं गन्ना की फसलों को अधिक जल की आवश्यकता होती है।
- प्राचीन समय से ही पानी का उपयोग सिंचाई के लिए होता है।
- कावेरी नदी में से ‘ग्रांड एनिकट’ नाम से प्रसिध्द नहर का निर्माण दूसरी सदी में हुआ था।
- 1882 में उत्तरप्रदेश की पूर्वीय यमुना नहर का निर्माण किया गया था।
- भारत में सिंचाई के मुख्य तीन माध्यम है।
1. कुआँ एवं ट्यूबवेल
2. नहर और
3. तालाब
- इन में कुआँ एवं ट्यूबवेल सिंचाई के मुख्य माध्यम है।
- नहर एवं तालाब क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर आते है।
- नहरों द्वारा सतलज, यमुना एवं गंगा के विशाल मैदानों तथा पूर्व के तटीय मैदानों में स्थित महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी के मुख त्रिकोण प्रदेशों में होती है।
- कुआँ एवं ट्यूबवेल कांप के मैदानों में सामान्य है।
- तालाबों द्वारा होने वाली सिंचाई पूर्व एवं दक्षिण के राज्यों में अधिक है।
4. बहुउद्देशीय योजना की समझ दीजिए।
उत्तर :
- भारत में अनेक छोटी बड़ी नदियां बहती है ।
- भारत का जल परिवाह विशाल है ।
- इसका कारण भारत का भूपृष्ठ ऐसा है की अनेक नदियां दूसरी नदियों से मिलकर उसका पानी समुद्र में ले जाती है ।
- इस जल का उपयोग अनेक उद्देश्यों के लिए हो, इसलिए कई नदियों पर बहुउद्देशीय योजनाएं बनाई गई है ।
- बहूद्देशीय अर्थात नदी-घाटियों के साथ जुड़ी विभिन्न समस्याओं को हल करना ।
- इस में बाढ़-नियंत्रण, जमीन कटाव को रोकना, सिंचाई एवं पेयजल, उद्योग, बस्तियों को दिया जानेवाला पानी, बिजली उत्पादन, आंतरिक जल परिवहन, मनोरंजन, वन्यजीव संरक्षण एवं मत्स्य पालन के विकास का समावेश होता है ।

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