उत्तर :
- भारत के प्रत्येक राज्य के संदर्भ में सिंचाई क्षेत्रों में बड़ा अंतर है।
- आंध्र प्रदेश के तटीय जिले तथा गोदावरी,
- कृष्णा नदी के मुख त्रिकोण प्रदेश,
- ओडिशा की महा नदी का मुख त्रिकोण प्रदेश,
- तमिलनाडु में कावेरी का मुख त्रिकोण प्रदेश,
- पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि देश के सघन सिंचाई क्षेत्र है।
- स्वतंत्रता पश्चात भारत का कुल सिंचाई क्षेत्र लगभग चार गुना बढ़ा है।
- स्पष्ट बुवाई क्षेत्र के लगभग 38% भाग में सिंचाई होती है।
- भारत के राज्यों में सिंचाई क्षेत्र के वितरण में बड़ी असमानता है।
- मिजोरम में स्पष्ट बुवाई क्षेत्र में केवल 7.3% क्षेत्र में सिंचाई होती है।
- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू एवं कश्मीर, तमिलनाडु एवं मणिपुर में कुल बुवाई विस्तार सिंचाई के अंतर्गत है।
6. जल संकट का परिचय दीजिए।
उत्तर :
- जल प्रकृति से मिली अनमोल भेंट है।
- बढ़ती जन संख्या के लिए अनाज की बढ़ती मांग, नकदी फसलों का उत्पादन, बढ़ते शहरी करण एवं लोगों के बदलते जीवन स्तर के परिणाम स्वरूप पानी की तंगी निरंतर बढ़ रही है।
- वर्तमान समय में भी पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों के आंतरिक भागों में जल संकट की गंभीर समस्या है।
- सैकड़ों गाँव तथा कुछ नगरों में भी पानी की गुणवत्ता घट रही है।
- पानी की गुणवत्ता घट ने से जल जन्य बीमारियाँ फैलती जा रही है।
- पेयजल की प्राप्यता तथा शुद्धता जीवन की आधारभूत आवश्यकता है।
- पीने की पानी की सुविधा बढ़ाने के लिए किए गए प्रयत्नों के बावजूद भी पानी की मांग एवं उसकी आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर है।
- भारत में 8% शहरों में पेयजल की तीव्र कमी है।
- देश में लगभग 50% गांवों में आज भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना बाकी है।
- भारत में सिंचाई सुविधा में भारी विकास हुआ है, लेकिन दो-तिहाई कृषि क्षेत्र अभी भी वर्षा पर आधारित है।
- वर्तमान समय में कुएं एवं ट्यूबवेल द्वारा अधिक से अधिक मात्रा में पानी बाहर निकालने से भूमिगत जल का स्तर नीचा गया है। परिणाम स्वरूप जल संसाधन घटा है।
- कुछ राज्यों में भूमिगत जल को अधिक मात्रा में निकालने से देश में गंभीर प्रश्न खड़े हुए है।
- पानी की घटती गुणवत्ता और बढ़ती तंगी जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
- कृषि उपरांत उद्योगों में पानी का अनियंत्रित उपयोग होता है।
- घरेलू तथा इकाइयों के दूषित जल, जल प्रदूषण का मुख्य स्त्रोत है।
7. जल संसाधनों की सुरक्षा एवं व्यवस्थापन के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर :
- जल संसाधन मर्यादित है, इसका वितरण भी असमान है, साथ में प्रदूषित जल की समस्या है।
- जल संसाधन का विवेक पूर्ण उपयोग तथा पर्याप्त जल की प्राप्यता के लिए उपाय करने की आवश्यकता है।
- ‘जल’ ऐसा संसाधन है की उसका संबंध समग्र जीव सृष्टि के साथ जुड़ा है।
- जल संसाधन को सुरक्षा के उपाय अलग-अलग स्तर पर करने की आवश्यकता है।
- जल संसाधन की सुरक्षा ‘जल संरक्षण’ के रूप में जानी जाती है।
- जल संरक्षण के कुछ सामान्य उपाय निम्न लिखित है।
1. जल संचय के लिए अधिक से अधिक जलाशयों का निर्माण
2. एक नदी बेसिन के साथ दूसरी नदी बेसिन को जोड़ना
3. भूमिगत स्तर को ऊपर लाना
- जल एक राष्ट्रीय संपदा है।
8. वृष्टि जल संचय किस प्रकार से कर सकते है?
उत्तर :
- वृष्टि जल को रोककर एकत्र करने की विशेष पद्धतियाँ जैसे कुएं, छोटे बांध, खेत – तलैया आदि का निर्माण करने का समावेश किया जाता है।
- उपरोक्त माध्यमों के द्वारा संचयन होता है।
- यहाँ भूमिगत जलस्तर भी ऊंचा आता है।
- ऐसा करने से घरेलू एवं कृषि आवश्यकता पूरी हो सकती है।
9. वृष्टि जल संचय के मुख्य उद्देश्य कौन - कौन से है?
उत्तर :
- भूमिगत जल को एकत्र करने की क्षमता बढ़ाना तथा उनके जल स्तर को बढ़ाना।
- जल प्रदूषण घटाना।
- भूमि जल की गुणवत्ता सुधारना।
- स्थल मार्गों को जल – भरवा से बचाना।
- सतह से बह जाने वाले पानी की जल राशि घटाना।
- गर्मी एवं लंबे शुष्क समय में पानी से घरेलू आवश्यकता पूर्ण करना।
- पानी की बढ़ती मांग को पूर्ण करना।
- बड़े शहरों में बहु मंजिले आवासों के बीच के पानी का संग्रह हो इसलिए भूमिगत टाँकिया अथवा वर्षा जल जमीन में ऊतरे ऐसी व्यवस्था करना।
उत्तर :
- वृष्टि जल को रोककर एकत्र करने की विशेष पद्धतियाँ जैसे कुएं, छोटे बांध, खेत – तलैया आदि का निर्माण करने का समावेश किया जाता है।
- उपरोक्त माध्यमों के द्वारा संचयन होता है।
- यहाँ भूमिगत जलस्तर भी ऊंचा आता है।
- ऐसा करने से घरेलू एवं कृषि आवश्यकता पूरी हो सकती है।
9. वृष्टि जल संचय के मुख्य उद्देश्य कौन - कौन से है?
उत्तर :
- भूमिगत जल को एकत्र करने की क्षमता बढ़ाना तथा उनके जल स्तर को बढ़ाना।
- जल प्रदूषण घटाना।
- भूमि जल की गुणवत्ता सुधारना।
- स्थल मार्गों को जल – भरवा से बचाना।
- सतह से बह जाने वाले पानी की जल राशि घटाना।
- गर्मी एवं लंबे शुष्क समय में पानी से घरेलू आवश्यकता पूर्ण करना।
- पानी की बढ़ती मांग को पूर्ण करना।
- बड़े शहरों में बहु मंजिले आवासों के बीच के पानी का संग्रह हो इसलिए भूमिगत टाँकिया अथवा वर्षा जल जमीन में ऊतरे ऐसी व्यवस्था करना।
10. जल व्यवस्था के लिए कौन से मुद्दे ध्यान में रहने चाहिए?
उत्तर :
- बाग बगीचे, वाहन, शौचालय तथा वॉश बेसिन में उपयोग लिए जाने वाले पानी का मितव्ययिता पूर्ण उपयोग कारण चाहिए।
- लोक जागृति उत्पन्न कर तथा जल संरक्षण एवं उसके कुशल व्यवस्थापन से संबंधित प्रवृतियों में लोक सहयोग बढ़ाना।
- जलाशयों को प्रदूषण से बचाना।
- जल स्त्राव की सभी इकाइयों में कुएं, ट्यूबवेल, खेत तलैया आदि का उपयोग बढ़ाना।
- भूमिगत जल का उपयोग करने वाली इकाइयों पर ध्यान रखना।
- जल संरचना स्थानों की दुर्दशा तथा जल प्रदूषण को रोकने के लिए पानी की पाइपों का तुरंत रिपेरींग काम करना।
- प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक समान उपाय नहीं किए जा सकते है।
- जल संसाधनों का विकास एवं व्यवस्थापन के लिए संबंधित स्थानीय लोगों का सहकर लेकर उन्हें जोड़ना चाहिए।
उत्तर :
- बाग बगीचे, वाहन, शौचालय तथा वॉश बेसिन में उपयोग लिए जाने वाले पानी का मितव्ययिता पूर्ण उपयोग कारण चाहिए।
- लोक जागृति उत्पन्न कर तथा जल संरक्षण एवं उसके कुशल व्यवस्थापन से संबंधित प्रवृतियों में लोक सहयोग बढ़ाना।
- जलाशयों को प्रदूषण से बचाना।
- जल स्त्राव की सभी इकाइयों में कुएं, ट्यूबवेल, खेत तलैया आदि का उपयोग बढ़ाना।
- भूमिगत जल का उपयोग करने वाली इकाइयों पर ध्यान रखना।
- जल संरचना स्थानों की दुर्दशा तथा जल प्रदूषण को रोकने के लिए पानी की पाइपों का तुरंत रिपेरींग काम करना।
- प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक समान उपाय नहीं किए जा सकते है।
- जल संसाधनों का विकास एवं व्यवस्थापन के लिए संबंधित स्थानीय लोगों का सहकर लेकर उन्हें जोड़ना चाहिए।

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