त्रिलोचन जी का जीवन परिचय –
कवि त्रिलोचन जी का दूसरा नाम वासुदेव सिंह था। इनका जन्म सन 1917 में उत्तर प्रदेश सुल्तानपुर में हुआ था। हिंदी साहित्य में कवि त्रिलोचन जी का नाम प्रगतिशील काव्य के कारण प्रसिद्ध है। यह एक नहीं बल्कि बहुत सारे भाषाओं के ज्ञानी थे। यह कविता को लय में रख कर लिखते थे। इसलिए इनको इनके नाम के साथ एक उपाधि दी गई, जिस उपाधि का नाम था शास्त्री।
त्रिलोचन जी की कविताएं बेहद रोचक होती थी। इनके लिखने का अंदाज लोगों को बहुत भाता था और शायद यही कारण है कि यह बहुत ज्यादा प्रसिद्ध भी रहे। हिंदी साहित्य में त्रिलोचन जी बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हैं।
इनकी प्रमुख रचनाएं हैं—धरती, गुलाब और बुलबुल, उस जनपद का कवि।
इनको महात्मा गांधी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती कविता का सारांश –
इस कविता में कवि ने एक ऐसे पात्र को अपनी कविता में जगह दी है, जो खुद अनपढ़ है और कवि ने उसी के माध्यम से इस संपूर्ण कविता को लिखा है। चंपा एक अनपढ़ लड़की होने के कारण कुछ अजीबोगरीब बातें कवि के समक्ष कहती है और कवि को उसकी बातों पर हंसी आ जाती है। उसने क्या-क्या बातें कही, उन बातों को कहने का क्या अर्थ है, इन्हें कवि ने इस कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
चंपा एक ग्वाले की बेटी है और वह बहुत ही ज्यादा सुंदर है, मगर उसे पढ़ाई लिखाई के बारे में बहुत ज्यादा ज्ञान नहीं है। इसलिए कवि जब भी उसके पास बैठकर कुछ पढ़ते थे, तब वह उनके पढ़ी हुई बातों को ध्यान से सुनती थी। चंपा के लिए पढ़ाई काले अक्षर के समान है। जिस कारण उसे कवि का लिखना पढ़ना अच्छा नहीं लगता था और जब भी कवि उससे कभी पढ़ने को कहते थे, तो वह कहती थी कि यह तो गांधी बाबा की बात है और मुझे नहीं पढ़ना यह कहकर वह कवि की बात को टाल देती थी।
कभी-कभी वह कवि का पेन एवं कागज चुरा लेती थी ताकि कवि उन कागजों पर कुछ ना लिखें और वह सिर्फ उसी से बात करते रहे। कवि को उसकी यह सब आदतें कभी-कभी बहुत अच्छी लगती, तो कभी-कभी कवि उस पर गुस्सा हो जाते थे।
कवि चंपा से कहते हैं कि पढ़ाई लिखाई बहुत ज्यादा जरूरी है। पढ़ाई करने के बाद बेटी अपनी ससुराल चली जाती है और चंपा अगर पढ़ाई लिखाई करेगी, तो उसकी शादी हो जाएगी और उसका पति काम करने के लिए कोलकाता भी जाएगा। कोलकाता का नाम सुनते ही चंपा गुस्सा करती है और कहती है कि मुझे तो वैसे भी शादी नहीं करनी है। अगर मेरी शादी होगी भी, तो मैं अपने पति को कभी भी कोलकाता नहीं जाने दूंगी। कवि के सामने इस बात की कामना करती है कि कोलकाता में भारी विपत्ति पड़े।
यह कविता बहुत ही रोचक कविता है, जिसे पढ़कर पाठकों का दिल खुश हो जाएगा।
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती कविता –
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती
मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है
खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है
उसे बड़ा अचरज होता है:
इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर
निकला करते हैं
चंपा सुन्दर की लड़की है
सुन्दर ग्वाला है : गायें भैंसें रखता है
चंपा चौपायों को लेकर
चरवाही करने जाती है
चंपा अच्छी है
चंचल है
न ट ख ट भी है
कभी कभी ऊधम करती है
कभी कभी वह कलम चुरा देती है
जैसे तैसे उसे ढूंढ कर जब लाता हूँ
पाता हूँ – अब कागज गायब
परेशान फिर हो जाता हूँ
चंपा कहती है:
तुम कागद ही गोदा करते हो दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चंपा चुप हो जाती है
उस दिन चंपा आई , मैने कहा कि
चंपा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़े काम सरेगा
गांधी बाबा की इच्छा है –
सब जन पढ़ना-लिखना सीखें
चंपा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढूंगी
तुम तो कहते थे गांधी बाबा अच्छे हैं
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढूंगी
मैने कहा चंपा, पढ़ लेना अच्छा है
ब्याह तुम्हारा होगा , तुम गौने जाओगी,
कुछ दिन बालम संग साथ रह चला जाएगा जब कलकत्ता
बड़ी दूर है वह कलकत्ता
कैसे उसे सँदेसा दोगी
कैसे उसके पत्र पढ़ोगी
चंपा पढ़ लेना अच्छा है!
चंपा बोली : तुम कितने झूठे हो, देखा,
हाय राम , तुम पढ़-लिख कर इतने झूठे हो
मैं तो ब्याह कभी न करुंगी
और कहीं जो ब्याह हो गया
तो मैं अपने बालम को संग साथ रखूंगी
कलकत्ता में कभी न जाने दूंगी
कलकत्ते पर बजर गिरे।
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती कविता का भावार्थ –
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती
मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है
खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है
उसे बड़ा अचरज होता है:
इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर
निकला करते हैं
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या: कविता के प्रथम अंश में कवि एक लड़की के बारे में बताते हैं, जो पढ़ी-लिखी नहीं है, जिसका नाम चंपा है। चंपा चुकी पढ़ी-लिखी नहीं रहती है, उसे अक्षरों का ज्ञान भी नहीं होता है। उसे यह काले-काले अक्षर अजीब लगते हैं। जब कवि उन कालो अक्षरों को उसके सामने पढ़ते हैं, तो उसे लगता है कि क्या यह काले काले अक्षर भी स्वर निकाल सकते हैं, ध्वनि निकाल सकते हैं? बस इन्हीं सब चीजों के बारे में चंपा सोचती और कवि उसी के बारे में यहां पर बता रहे हैं।
चंपा सुन्दर की लड़की है
सुन्दर ग्वाला है : गायें भैंसें रखता है
चंपा चौपायों को लेकर
चरवाही करने जाती है
चंपा अच्छी है
चंचल है
न ट ख ट भी है
कभी कभी ऊधम करती है
कभी कभी वह कलम चुरा देती है
जैसे तैसे उसे ढूंढ कर जब लाता हूँ
पाता हूँ – अब कागज गायब
परेशान फिर हो जाता हूँ
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या: कवि कविता के इस दूसरे भाग में चंपा के विषय में ही बातें करते हैं कि चंपा एक सुंदर नाम के ग्वाले की बेटी है। जो स्वयं बहुत ही ज्यादा सुंदर है एवं चंचल भी है। वह गाय एवं भैंसों को चराने ले जाती है एवं कवि को अपनी शरारतों से बहुत तंग भी करती है। चंपा कभी कवि का कलम छुपा देती है, तो कभी कागज। चंपा की शरारतों से कभी-कभी कवि परेशान भी जो जाते थे।
चंपा कहती है:
तुम कागद ही गोदा करते हो दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चंपा चुप हो जाती है
उस दिन चंपा आई , मैने कहा कि
चंपा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़े काम सरेगा
गांधी बाबा की इच्छा है –
सब जन पढ़ना-लिखना सीखें
चंपा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढूंगी
तुम तो कहते थे गांधी बाबा अच्छे हैं
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढूंगी
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या: कविता के इस अंश में कवि ने भागने की स्थिति को दिखाया है। जहां पर चंपा और गांव वाले पढ़ाई लिखाई से दूर भागते हुए नजर आते हैं। आपने यह बात सुनी होगी एवं देखी भी होगा कि जब लोगों को कोई चीज अच्छी नहीं लगती है, तो वह चीज उनके लिए बुरी बन जाती है।
बहुत से बच्चों को गणित का विषय समझ में नहीं आता है, इसलिए वह विषय उनके लिए कठिन हो जाता है। वह गणित से पीछे भागते हैं, मगर जिन्हें गणित का विषय पसंद है। वे गणित से बेइंतहा मोहब्बत करते हैं एवं वह विषय उनके लिए बहुत अच्छा होता है।
इसी तरीके से पढ़ाई लिखाई जो कभी नहीं किए हैं, उनको लगता है कि पढ़ाई लिखाई करना बहुत ही कठिन काम है और इस कविता में चंपा को भी कुछ ऐसा ही लगता है कि पढ़ाई लिखाई उसकी बस की बात नहीं है और इसलिए वह पढ़ना-लिखना नहीं चाहती है।
कवि जब भी चंपा से मिलते थे या चंपा जब भी कभी से मिलती थी, तो कवि हमेशा कागज़ में कुछ न कुछ लिखते रहते थे। चंपा को कवि का कागज में यू लिखना अच्छा नहीं लगता था। इसलिए वह कहती थी कि तुम यह कागज में क्या लिखते हो, पढ़ाई करते रहते हो, इसमें क्या रखा है। अर्थात चंपा के अनुसार कागज पर लिखना कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है।
कवि पढ़ाई लिखाई पर जोर देते हुए चंपा से कहते हैं कि तू भी पढ़ाई कर ले यह पढ़ाई तेरे बहुत काम आएगी और वह गांधीजी के बारे में बताते हुए भी कहते हैं कि स्वयं महात्मा गांधी चाहते थे कि देश के सभी लोग पढ़ाई लिखाई करें एवं अच्छे नागरिक बने। तब चंपा पलट कर जवाब देती है कि तुम तो कहते थे कि वह अच्छा आदमी है भला अच्छा आदमी पढ़ने लिखने की बात कब से करने लगा। इस तरह से वह पढ़ाई लिखाई के प्रति अपना मुंह मोड़ लेती है और फिर से कहती है कि मैं पढ़ाई नहीं करूंगी।
मैने कहा चंपा, पढ़ लेना अच्छा है
ब्याह तुम्हारा होगा , तुम गौने जाओगी,
कुछ दिन बालम संग साथ रह चला जाएगा जब कलकत्ता
बड़ी दूर है वह कलकत्ता
कैसे उसे सँदेसा दोगी
कैसे उसके पत्र पढ़ोगी
चंपा पढ़ लेना अच्छा है!
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या: कविता के इस अंश में कवि फिर से चंपा को पढ़ाई लिखाई के गुणों के बारे में बताते हैं कि पढ़ाई लिखाई उसके लिए कितना जरूरी है। पढ़ाई उसके लिए आगे चलकर बहुत काम आ सकता है। कवि कहते हैं कि चंपा तुम्हारी शादी हो जाएगी, तो तुम शादी के बाद अपने ससुराल चली जाओगी और अगर तुम्हारा पति काम के सिलसिले से कोलकाता जाएगा, तो वह दूर हो जाएगा और तुम फिर उससे चिट्ठी के माध्यम से कैसे बात करोगी। बिना पढ़ाई लिखाई किए तुम एक चिट्ठी भी नहीं लिख सकती हो और इस तरीके से तुम दोनों के बीच बातचीत भी होना असंभव है।
चंपा बोली : तुम कितने झूठे हो, देखा,
हाय राम , तुम पढ़-लिख कर इतने झूठे हो
मैं तो ब्याह कभी न करुंगी
और कहीं जो ब्याह हो गया
तो मैं अपने बालम को संग साथ रखूंगी
कलकत्ता में कभी न जाने दूंगी
कलकत्ते पर बजर गिरे।
चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या: चंपा कवि द्वारा यह सुनने पर बहुत रूठ जाती है कि कवि ने उसे पढ़ने-लिखने के लिए कहा है। वह कवि से कहती है कि तुम तो बहुत झूठ बोलते हो, पढ़-लिख कर क्या फ़ायदा जब तुम झूठ ही बोलोगे, तो तुमने पढ़ाई क्यों कि? चंपा को लगता है कि पढ़ना-लिखना बुरी बात है और पढ़-लिख कर कभी किसी का भला नहीं होता है और फिर वह कवि से कहती हैं कि मैं शादी नहीं करूंगी और अगर मैं शादी करूंगी भी तो अपने पति को कभी भी कोलकाता जाने नहीं दूंगी अपने पास ही रखूंगी।
वह फिर कलकत्ता शहर को बुरा कहती है और उस शहर का बुरा चाहती है कि ऐसे शहरों में कहर बरसे, जो एक व्यक्ति को अपने परिवार से दूर करता है।
अर्थात दूसरे तरीके से अगर देखा जाए, तो यहां चंपा अपने पति का शोषण होता भी नहीं देखना चाहती है। वह अपने पति को अपने साथ अपने पास रखना चाहती है, ताकि वह अच्छे से उसका ख्याल रख सके और उसके हर बुरे वक्त की खबर भी उसे अच्छे से हो। अगर उसका पति दूर रहेगा, तो वह उसकी जानकारी नहीं रख पाएगी और इससे उसके परिवार में भी मुसीबतें बढ़ेंगी।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
कविता के साथ
प्रश्न. 1.
चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कलकत्ता पर बजर गिरे?
उत्तर:
चंपा नहीं चाहती थी कि उसका पति उसे छोड़कर कमाने के लिए कलकत्ता जाए। कलकत्ता शहर परिवारों को तोड़ने वाला है। यह प्रतीक है-शोषण का। इस शोषण से आम व्यक्ति का जीवन नष्ट हो जाता है। चंपा अपने पति से अलग नहीं होना चाहती। अत: वह कलकत्ता का विनाश चाहती है ताकि उसका परिवार नहीं टूटे।
प्रश्न. 2.
चंपा को इस पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा ने पढ़ने-लिखने की बात कही होगी?
उत्तर:
चंपा को पहले कवि द्वारा ही यह ज्ञान दिया गया था कि गांधी बाबा बहुत अच्छे हैं। दूसरी तरफ कवि का दिन-भर लिखते-पढ़ते रहना चंपा को अजीब-सा काम लगता है या यह भी कहा जा सकता है कि उसे बुरा लगता है, बेकार काम लगता है। इसीलिए उसे विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा जैसे अच्छे इंसान पढ़ने-लिखने की बात कह सकते हैं।
प्रश्न. 3.
कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर:
कवि ने चंपा की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है-वह निरक्षर है। उसे अक्षर मात्र काले चिहन लगते हैं।
वह सदैव निरक्षर रहना चाहती है।
वह शरारती स्वभाव की है। वह कवि के कागज, पेन छिपा देती है।
वह भोली है। वह कवि को पढ़ते हुए हैरानी से देखती रहती है।
वह स्पष्ट वादिनी है। वह अपनी बात को घुमा-फिराकर नहीं कहती।
वह विद्रोही स्वभाव की है। उसे पता है कि शिक्षित व्यक्ति अपने परिवार को छोड़कर दूसरे शहर चला जाता है। अत: वह कहती है-कलकत्ता पर आपदा आए।
वह मेहनती है। वह प्रतिदिन दुधारू पशुओं को चराकर लाती है।
चंपा में परिवार के साथ मिलकर रहने की भावना है। वह परिवार को तोड़ना नहीं चाहती।
प्रश्न. 4.
आपके विचार में चंपा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मैं तो नहीं पढ़ेगी?
उत्तर:
मेरे विचार में चंपा एक ग्रामीण लड़की है जो दिन-भर प्रकृति की गोद में पशु चराने का काम करती है। स्वभाव से नटखट है और कवि को दिन-भर बैठकर लिखते-पढ़ते देखती है। उसे यह बुरा लगता है कि दिन-भर बैठे रहो। वह सोचती होगी कि पढ़ना-लिखना स्वच्छंदता में बाधक है। दूसरे, पढ़े-लिखे लोग अपनों को छोड़कर कलकत्ता चले जाते थे, इसलिए वह पढ़ना नहीं चाहती।
कविता के आस-पास
प्रश्न. 1.
यदि चंपा पढ़ी-लिखी होती, तो कवि से कैसे बातें करती?
उत्तर:
यदि चंपा पढ़ी-लिखी होती तो वह कवि से सहजता से बात नहीं करती। वह हर बात को घुमा-फिराकर कहती। उसमें बनावटीपन होता। वह विद्रोह का स्वर भी नहीं दिखाती। इसके अलावा, वह कवि की योग्यता का सम्मान करती।
प्रश्न. 2.
इस कविता में पूर्वी प्रदेशों की स्त्रियों की किस विडंबनात्मक स्थिति का वर्णन हुआ है?
उत्तर:
पूर्वी प्रदेश में स्त्रियों को ऐसा वातावरण ही नहीं मिलता कि वे पढ़ाई-लिखाई के सही महत्त्व को समझ सकें। वे कूप मंडूक की भाँति अपने कामों में ही लगी रहती हैं। वे बाहरी दुनिया से बेखबर हैं। उनकी समझ और सोच का विकास नहीं हो पाता। कई बार अपनी इस कमजोरी के कारण उन्हें समाज और परिवार में वह मान-सम्मान नहीं मिल पाता जो मिलना चाहिए।
प्रश्न. 3.
संदेश ग्रहण करने और भेजने में असमर्थ होने पर एक अनपढ़ लड़की को किस वेदना और विपत्ति को भोगना पड़ता है, अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर:
संदेश ग्रहण करने और भेजने में असमर्थ होने पर एक अनपढ़ लड़की को असहनीय वेदना सहनी पड़ती है। वह विरह की आग में झुलसती है। वह किसी को अपने मन की प्रेम की बातें नहीं बता सकती। उसे अकेलेपन की पीड़ा सहनी पड़ती है। पति का पत्र दूसरे से पढ़वाने पर लोकलाज का डर होता है।
प्रश्न. 4.
त्रिलोचन पर एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा बनाई गई फ़िल्म देखिए।
उत्तर:
यह फ़िल्म एन.सी.ई.आर.टी. के पुस्तकालय से लेकर देखी जा सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न. 1.
कविता में हमारे समाज की किस समस्या को उकेरा गया है?
उत्तर:
कविता में अत्यंत सरल ढंग से हमारे देश की गंभीर समस्या निरक्षरता को चित्रित किया गया है। विशेषतः स्त्रियों में शिक्षा के प्रति उपेक्षा भाव को उकेरने का सुंदर तथा सार्थक प्रयत्न किया गया है।
प्रश्न. 2.
कवि त्रिलोचन ने सामान्य बोलचाल की भाषा में भी अलंकारों को स्थान दिया है, उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर:
सामान्य बातचीत के रूप में कही गई कविता में जब दो-तीन पंक्तियों में कवि चंपा, चौपायों, चरवाही आदि शब्द कहता है तो पाठक अनुप्रास की छवि देखता है। काले-काले, खड़ी-खड़ी, कभी-कभी आदि शब्द-युग्मों का प्रयोग किया गया है। बात को प्रभावशाली बनाने के लिए पुनरुक्ति प्रकाश (झूठे हो, झूठे हो, नहीं पहुँगी, नहीं पढ़ेंगी) का प्रयोग किया गया है।
प्रश्न. 3.
कविता में से उन स्थलों का उल्लेख कीजिए जिनसे आपको यह ज्ञान होता है कि चंपा पढ़ाई की उपेक्षा करती है।
उत्तर:
सर्वप्रथम तो चंपा कवि से यही पूछती है कि क्या ये बहुत अच्छा काम है?’ फिर वह कहती है कि ‘तुम तो कहते थे कि गांधी जी अच्छे हैं फिर वे पढ़ने की बात कैसे कर सकते हैं?’ अंत में तो वह साफ़ कह देती है कि मैं तो नहीं पहुँगी’। इन सभी बातों से पढ़ने के प्रति चंपा की उपेक्षा झलकती है।
प्रश्न. 4.
कविता की नायिका चंपा किसका प्रतिनिधित्व करती है?
उत्तर:
चंपा हमारे देश की सभी अनपढ़ और अबोध स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती है। ये अबोध बालिकाएँ जो उपेक्षा की शिकार हैं और स्वयं अवसर मिलने पर भी पढ़ाई-लिखाई की उपेक्षा करती हैं, उसके महत्त्व को नहीं समझतीं।
प्रश्न. 5.
विवाह और पति के प्रति चंपा की क्या धारणा है?
उत्तर:
ब्याह की बात सुनते ही चंपा लजाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करती है कि मैं तो ब्याह नहीं करूंगी। जब पति की बात आती है तो वह स्पष्ट करती है कि मैं तो अपने बालम को सदा साथ रसुँगी उसे कलकत्ते ना जाने देंगी, कलकत्ते पर बजर गिरे। स्त्री सुलभ स्वभाव, लज्जा, विरह की अनिच्छा और विरह के कारण को ही नष्ट करने की धारणा का बोध होता है।
प्रश्न. 6.
कवि त्रिलोचन की भाषा को ‘ठेठ का ठाठ’ क्यों कहा गया है? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
कवित त्रिलोचन बहुभाषाविज्ञ शास्त्री हैं, लेकिन यह शास्त्रीयता उनकी कविता के लिए बोझ नहीं बनती। वे मंद लय के कवि हैं। इस कविता में उन्होंने बोलचाल की भाषा को नाटकीय बनाकर कविता को नया आयाम दिया है; जैसे-‘कलकत्ते पर बजर गिरे’, ‘हाय राम! कितने झूठे हो’, ‘काले काले अच्छर’, ‘गाँव की ज़मीन से जुड़ी बातें’ ठेठ गाँव की याद दिलाती हैं। इसलिए उनकी भाषा को ‘ठेठ का ठाठ’ कहा गया है।
प्रश्न. 7.
चंपा के मन में अक्षरों के प्रति क्या जिज्ञासा है?
उत्तर:
चंपा एक अनपढ़ ग्रामीण लड़की है। उसके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। वह जब कवि को पढ़ते-लिखते हुए देखगी है तो उसे यह बात अजूबा-सी लगती है कि इन काले काले अक्षरों में स्वर कैसे निकलते हैं? क्या यह (लिखना) काम बहुत अच्छा है?
प्रश्न. 8.
चंपा के नटखट स्वभाव को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चंपा कवि के साथ कभी-कभी ऊधम मचाती है और कवि को तंग करने के लिए उनकी कलम छिपा देती है। जब कवि अपनी कलम हूँढ़कर लाते हैं तो देखते हैं कि उनके कागज़ गायब हैं। यह भी उसके स्वभाव की शरारत ही है जो वह कहती है कि तुम झूठे हो और कलकत्ते पर बजर गिरे।।
प्रश्न. 9.
इस कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट करें।
उत्तर:
‘चंपा काले-काले अच्छर नहीं चीन्हती’ कविता में कवि ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँव की एक भोली-भाली अनपढ़ लड़की का चित्रण किया है। चंपा निरक्षर है जो वह पढ़ने लिखने को व्यर्थ समझती है। अक्षरों के लिए कवि ‘काले-काले’ विशेषण का प्रयोग करके शिक्षा-व्यवस्था की कलई खोलता है। कविता की नायिका चंपा शोषक व्यवस्था के विरोध में खड़ी हो जाती है वह ‘कलकत्ते पर बजर गिरे’ कहकर अपने जीवन की सुरक्षा के प्रति सचेत होने का संकेत दे जाती है। शोषक व्यवस्था का अंत होना ही चाहिए।

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