चंद्रकांत देवताले का जीवन परिचय: चंद्रकांत देवताले का जन्म मध्यप्रदेश के जौलखेड़ा गाँव में सन 1936 में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा इंदौर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मुक्तिबोध पर सागर विश्वविद्यालय, सागर से पी-एच. डी. की। उन्होंने अपनी कविताओं में मनुष्य के सुख-दुःख, विशेषकर औरतों और बच्चों को स्थान दिया था। देवताले की कविताओं में जूता पॉलिश करते हुए एक लड़के से लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति तक शामिल होते हैं। वे ‘दुनिया के सबसे गरीब आदमी’ से लेकर ‘बुद्ध के देश में बुश’ तक पर कविताएं लिखते थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में दलितों, वंचितों, आदिवासियों, शोषितों आदि को जगह दी।
चंद्रकांत देवताले को ढेर सारे पुरस्कार मिले, जिसमें अंतिम महत्त्वपूर्ण पुरस्कार, सन 2012 का साहित्य अकादमी पुरस्कार था। यह उनके कविता संग्रह ‘पत्थर फेंक रहा हूं’ के लिए दिया गया था। देवताले की कविता की जड़ें गाँव-कस्बों और निम्न मध्यवर्ग के जीवन में हैं। उनमें मानव जीवन अपनी विविधता और विडंबनाओं के साथ उपस्थित हुआ है। कवि में जहाँ व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा है, वहीं मानवीय प्रेम-भाव भी है। वह अपनी बात सीधे और मारक ढंग से कहते हैं। कविता की भाषा में अत्यंत पारदर्शिता और एक विरल संगीतात्मकता दिखाई देती है।
यमराज की दिशा कविता का सार- : अपनी इस कविता में कवि सभ्यता के विकास की खतरनाक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहना चाहता है कि आज के समाज में चारों तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। समाज में हर जगह बुराई फ़ैल चुकी है। कवि को लगता है कि अब चारों तरफ यमराज का ही वास है। शहरों में चारों ओर बनी ऊँची-ऊँची इमारतें उन्हें यमराज की याद दिलाती हैं। हर जगह लोगों में भ्रष्टाचार, हिंसा, लालच जैसी भावनाएं घुस चुकी हैं और इसी कारणवश वे सभी एक-दूसरे को मौत की नींद सुलाने वाले हैं। कवि अपनी माता को याद करता है, जिन्होंने उसे बताया था कि दक्षिण दिशा में यमराज का वास है। लेकिन अब कवि को लगता है कि यमराज सर्वयापी है और इसी वजह से वो चैन की नींद नहीं सो पा रहा है।
यमराज की दिशा- चंद्रकांत देवताले
माँ की ईश्वर से मुलाकात हुई या नहीं
कहना मुश्किल है
पर वह जताती थी जैसे
ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है
और उससे प्राप्त सलाहों के अनुसार
जिंदगी जीने और दुख बर्दाश्त करने
के रास्ते खोज लेती है
माँ ने एक बार मुझसे कहा था-
दक्षिण की तरफ पैर करके मत सोना
वह मृत्यु की दिशा है
और यमराज को क्रुद्ध करना
बुद्धिमानी की बात नहीं
तब मैं छोटा था
और मैंने यमराज के घर का पता पूछा था
उसने बताया था-
तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा दक्षिण में
माँ की समझाइश के बाद
दक्षिण दिशा में पैर करके मैं कभी नहीं सोया
और इससे इतना फायदा जरूर हुआ
दक्षिण दिशा पहचानने में
मुझे कभी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा
मैं दक्षिण में दूर-दूर तक गया
और मुझे हमेशा माँ याद आई
दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था
होता छोर तक पहुँच पाना
तो यमराज का घर देख लेता
पर आज जिधर भी पैर करके सोओ
वही दक्षिण दिशा हो जाती है
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं
माँ अब नहीं हैं
और यमराज की दिशा भी अब वह नहीं रही
जो माँ जानती थी
यमराज की दिशा –
माँ की ईश्वर से मुलाकात हुई या नहीं
कहना मुश्किल है
पर वह जताती थी जैसे
ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है
और उससे प्राप्त सलाहों के अनुसार
जिंदगी जीने और दुख बर्दाश्त करने
के रास्ते खोज लेती है
यमराज की दिशा भावार्थ :- इन पंक्तियों में कवि ने अपनी माँ के ऊपर अपने विश्वास और उनकी माँ के ईश्वर पर विश्वास का वर्णन किया है। उनके अनुसार उन्हें यह नहीं पता कि उनकी माँ ने ईश्वर को देखा है कि नहीं और यह अनुमान लगाना भी लेखक के लिए बहुत कठिन है। लेकिन उनकी माँ उन्हें यह विश्वास दिलाती थीं कि उनके और ईश्वर के बीच बातचीत होती रहती है और ईश्वर उन्हें जिंदगी जीने की ज़रूरी सलाह देते रहते हैं। ईश्वर से प्राप्त सलाह के अनुसार उनकी माँ जिंदगी जीने और दुःख बर्दाश्त करने के रास्ते खोज लेती है। माँ कवि को भी जिंदगी जीने के सही रास्ते बताती है और समस्याओं का सामना करने की प्रेरणा देती है।
माँ ने एक बार मुझसे कहा था-
दक्षिण की तरफ पैर करके मत सोना
वह मृत्यु की दिशा है
और यमराज को क्रुद्ध करना
बुद्धिमानी की बात नहीं
यमराज की दिशा भावार्थ :- जब कवि बच्चे थे, तब उनकी माँ ने उन्हें बहुत सारी शिक्षाऐं दी थी। उन शिक्षाओं में से एक यह भी थी कि दक्षिण दिशा की ओर पैर करके कभी नहीं सोना चाहिए। दक्षिण दिशा में यमराज (मृत्यु के देवता) का निवास होता है। अगर हम दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोएंगे, तो यमराज को गुस्सा आ जाएगा। इसलिए हमारा इस दिशा में पैर करके ना सोना ही चतुराई है, क्योंकि मृत्यु के देवता, यमराज को गुस्सा दिलाना कोई बुद्धिमानी की बात नहीं है।
तब मैं छोटा था
और मैंने यमराज के घर का पता पूछा था
उसने बताया था-
तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा दक्षिण में
यमराज की दिशा भावार्थ :- प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बच्चों के कोमल मन में उठने वाले सवालों का वर्णन किया है। किस प्रकार एक बच्चा अपनी माँ के समझाने के बाद उससे यमराज के घर का पता पूछने लगता है। माँ की कुशलता का तो कोई जवाब ही नहीं है। उसे पता है कि बच्चे को किस तरह समझाना है। वह अपने बच्चे को बोल देती है कि तुम जहाँ पर भी रहो, उस जगह से दक्षिण दिशा की तरफ हमेशा यमराज का वास होगा। प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने दक्षिण दिशा के द्वारा दक्षिणपंथी विचारधारा को यमराज बताया है क्योंकि जो भी इसके चंगुल में आता है, वह अपनी सभ्यता-संस्कृति का नाश कर बैठता है, इस तरह उसका सर्वनाश हो जाता है।
माँ की समझाइश के बाद
दक्षिण दिशा में पैर करके मैं कभी नहीं सोया
और इससे इतना फायदा जरूर हुआ
दक्षिण दिशा पहचानने में
मुझे कभी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा
यमराज की दिशा भावार्थ :- इन पंक्तियों में कवि ने कहा है कि माँ के बार-बार समझाने से लेखक कभी भी दक्षिण दिशा में पैर करके नहीं सोया और इस चीज का एक अच्छा प्रभाव यह पड़ा कि लेखक को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी भी परेशानी नहीं हुई। इसका अर्थ यह है कि बड़े होने के बाद जब लेखक को अपनी माँ की दी हुई सीख समझ आयी, तो उन्हें दक्षिण दिशा का तात्पर्य समझ आया और अपनी माँ की दी हुई सीख पर अमल करते हुए, उन्होंने कभी भी दक्षिणपंथी विचारधारा को नहीं अपनाया। इससे उन्हें यह फायदा हुआ कि दूर रहकर उन्हें उनकी त्रुटियों का आभास हो गया।
मैं दक्षिण में दूर-दूर तक गया
और मुझे हमेशा माँ याद आई
दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था
होता छोर तक पहुँच पाना
तो यमराज का घर देख लेता
यमराज की दिशा भावार्थ :- यमराज का घर देखने के लिए कवि दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक गया और जब भी वह दक्षिण दिशा में यात्रा करता, हर समय उसे अपने माँ की दी हुई सीख याद आती। दक्षिण दिशा में यमराज का घर होता है। इसी कारणवश वह यमराज का घर खोजने में लग जाता है, लेकिन कवि को कभी यमराज का घर नहीं मिला। उनके अनुसार दक्षिण दिशा का छोर (क्षितिज) बहुत ही दूर था, जिस तक कवि कभी पहुँच नहीं पाया और इसी वजह से उसे यमराज का घर भी नहीं मिला।
इसका अर्थ यह है कि जब भी वह दक्षिणपंथी विचारधारा की ओर बढ़ा हर बार उसे अपने माँ के द्वारा दी हुई सीख याद आई और इसी वजह से वह कभी भी उसके चंगुल में नहीं पड़ा। यही कारण है कि वह कभी भी दक्षिण विचारधारा को नहीं अपना पाया।
पर आज जिधर भी पैर करके सोओ
वही दक्षिण दिशा हो जाती है
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं
यमराज की दिशा भावार्थ :- कवि के अनुसार, उनकी माँ ने जब उन्हें यह सीख दी थी, तब यमराज का वास केवल दक्षिण दिशा में था। लेकिन अब ऐसा नहीं है, क्योंकि चारों दिशाओं में यमराज का वास हो गया है। इसीलिए जिधर भी पैर करके सोओ कवि को वही दक्षिण दिशा लगती है। इस तरह, पहले और आज की स्थिति में काफी अंतर आ चुका है। आज यमराज का विस्तार हर दिशा में हो चुका है। कवि जिस दिशा में पैर करके सोता है, उस दिशा में उसे यमराज के बड़े-बड़े आलीशान महल नजर आते हैं। उन इमारतों में यमराज की दहकती हुई लाल आँखें कवि को सोने नहीं देती हैं।
इसका अर्थ यह है कि पहले दक्षिणपंथी विचारधारा का खतरा केवल कुछ गिने-चुने लोगो से ही था। लेकिन आज ऐसा नहीं है क्योंकि अधिकांश लोग इस विचारधारा से ग्रस्त हो चुके हैं। इसलिए अब हम किसी भी दिशा में सुरक्षित नहीं। इस विचारधारा के लोग एक-दूसरे का शोषण करने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं।
माँ अब नहीं हैं
और यमराज की दिशा भी अब वह नहीं रही
जो माँ जानती थी
यमराज की दिशा भावार्थ :- लेखक के अनुसार माँ के चले जाने के उपरांत अब यमराज की दिशा भी बदल चुकी है। उसका विस्तार हर दिशा में हो चुका है। इसलिए माँ के द्वारा बताया गया नुस्खा अब किसी काम का नहीं रहा। लेखक जिस दिशा में भी पैर करके सोने की कोशिश करता है। हर तरफ लम्बी-लम्बी इमारतों में उसे यमराज की दहकती हुई आँखें नजर आती हैं। इसका अर्थ यह है कि अब चारों ओर पूँजीपतियों का वास है, जो साधारण जनता का शोषण करने में लगे हुए हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1.
कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल क्यों नहीं हुई?
उत्तर-
माँ के बार-बार समझाने अर्थात् बचपन से मिले गहरे संस्कारों के कारण कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल नहीं हुई।
प्रश्न 2.
कवि ने ऐसा क्यों कहा कि दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था?
उत्तर-
दक्षिण दिशा का कोई ओर-छोर नहीं है। वह अनंत है। इसलिए उसे लाँघ लेना संभव नहीं था। प्रतीकार्थ यह है कि शोषण-व्यवस्था का कोई निश्चित स्वरूप नहीं होता। यह मनोभावना नए-नए रूप धारण करती रहती है और अमर रहती है। इसलिए कोई हमेशा-हमेशा के लिए इससे मुक्त नहीं हो सकता।
प्रश्न 3.
कवि के अनुसार आज हर दिशा दक्षिण दिशा क्यों हो गई है?
उत्तर-
कवि के अनुसार, दक्षिण दिशा दक्षिणपंथी विचारधारा या पूँजीवादी विचारधारा की प्रतीक है। यह विचारधारा पूँजीवादियों और शोषकों को बढ़ावा देती है। कवि को आज की स्थितियाँ देखकर लगता है कि आज सब ओर पूँजीवादी शोषकों का बोलबाला हो गया है। जहाँ भी देखें, वहीं आम मनुष्य का शोषण हो रहा है।
प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए-
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं।
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं।
उत्तर-
कवि कहता है कि शोषण करने वाले लोग यमराज की भाँति क्रूर हैं। वे सर्वत्र ठाठ-बाट से निवास करते हैं। सब जगह उनका एक-सा हाल है। वे क्रोध, घृणा और क्रूरता से भरे हुए हैं। वे सबके साथ कठोरता से पेश आते हैं।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 5.
कवि की माँ ईश्वर से प्रेरणा पाकर उसे कुछ मार्ग-निर्देश देती है। आपकी माँ भी समय-समय पर आपको सीख देती होंगी-
(क) वह आपको क्या सीख देती हैं?
(ख) क्या उसकी हर सीख आपको उचित जान पड़ती है? यदि हाँ तो क्यों और नहीं तो क्यों नहीं?
उत्तर-
(क) मेरी माँ मुझे समय-समय पर गरीबों पर दया करने, बड़ों का आदर करने, गुरुओं का सम्मान करने और ईमानदार रहने की सीख देती रहती हैं।
(ख) मुझे अपनी माँ की सीख उचित जान पड़ती है।
क्यों-यदि माँ की जगह मैं होता और किसी को उपदेश देता तो इसी तरह देता। मैं अपने से छोटों या आश्रितों को भला बनने की ही सलाह देता। निस्वार्थ भाव से किसी का भला करने का यही सर्वोत्तम उपाय है।
प्रश्न 6.
कभी-कभी उचित-अनुचित निर्णय के पीछे ईश्वर का भय दिखाना आवश्यक हो जाता है, इसके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर-
मानव-मन में शुभ-अशुभ दोनों भाव हैं। कभी-कभी उसका अशुभ मनोभाव बहुत अधिक जाग्रत हो उठता है। तब वह खून, हत्या जैसे घिनौने कार्य भी कर बैठता है। इस स्थिति से बचाने के लिए ईश्वर का भय दिखाना बहुत आवश्यक होता है। ईश्वर से भयभीत व्यक्ति मन से ही मर्यादित हो जाता है। वह अहिंसक, निष्पाप और भला इनसान बन जाता है।
पाठेतर सक्रियता
प्रश्न 7.
कवि का मानना है कि आज शोषणकारी ताकतें अधिक हावी हो रही हैं। ‘आज की शोषणकारी शक्तियाँ’ विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए।
(आप शिक्षकों, सहपाठियों, पड़ोसियों, पुस्तकालय आदि से मदद ले सकते हैं।)
उत्तर-
‘आज की शोषणकारी शक्तियाँ’ विषय पर छात्र स्वयं अनुच्छेद लिखें।
अन्य पाठेतर हल प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कवि को ऐसा अनुभव क्यों हुआ कि उसकी माँ की ईश्वर से बातचीत होती रहती है? ‘यमराज की दिशा’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
कवि की माँ अपने कार्य व्यवहार से यह जताती रहती थी कि ईश्वर से वह बातचीत करती है और उसी की सलाह से जीवन की कठिनाइयों को सरलता से पारकर जाती है इसलिए कवि को ऐसा अनुभव हुआ कि उसकी माँ की ईश्वर से बातचीत होती रहती है।
प्रश्न 2.
‘यमराज की दिशा’ कविता में माँ ने कवि को जो भय दिखाया है। वह कितना सार्थक था?
उत्तर-
‘यमराज की दिशा’ कविता में माँ ने कवि को जो भय दिखाया था, वह पूरी तरह सार्थक था। इसी भय के कारण कवि को दक्षिण दिशा का ज्ञान हो गया और वह दक्षिण दिशा में कभी भी पैर करके नहीं सोया।
प्रश्न 3.
कवि की माँ को जीवन जीने के रास्ते कहाँ से प्राप्त होते थे? ‘यमराज की दिशा’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
कवि की माँ को जीवन जीने के रास्ते ईश्वर से हुई बातचीत और उससे प्राप्त सलाहों से प्राप्त होते थे। इन्हीं सलाहों के सहारे वह जीवन के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों को आसानी से पार करती जा रही थी।
प्रश्न 4.
कवि ने बचपन में माँ से किसका पता पूछा था और क्यों? ‘यमराज की दिशा’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
कवि ने बचपन में माँ से यमराज के घर का पता पूछा था क्योंकि कवि को माँ ने बता दिया था कि दक्षिण की ओर पैर करके मत सोना। इसी दिशा में मृत्यु के देवता यमराज का घर है।
प्रश्न 5.
‘यमराज की दिशा’ कविता में कवि दक्षिण दिशा में दूर तक गया फिर भी वह यमराज का घर क्यों नहीं देख पाया?
उत्तर-
कवि दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक गया फिर भी वह यमराज को घर नहीं देख पाया क्योंकि माँ की सीख के अनुसार, यमराज दक्षिण दिशा में रहता है परंतु दक्षिण दिशा का कोई अंत नहीं है। दूर-दूर तक जाने पर भी न दक्षिण दिशा का अंत हुआ और न कवि यमराज का घर देख पाया।
प्रश्न 6.
दक्षिण दिशा का प्रतीकार्थ क्या है? यह दिशा जनसाधारण के लिए शुभ क्यों नहीं होती है?
उत्तर-
दक्षिण दिशा का प्रतीकार्थ है दक्षिणपंथी विचारधारा, जिसमें आम इनसान के हित के लिए कोई स्थान नहीं है। इस विचारधारा के लोग जन साधारण का शोषण करते हैं तथा उनके जीवन के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं, इसलिए जन साधारण के लिए यह दिशा शुभ नहीं है।
प्रश्न 7.
‘सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं’ ऐसा कहकर कवि ने किस ओर संकेत किया है?
उत्तर-
‘सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं’ के माध्यम से कवि ने समाज में फैली शोषण व्यवस्था और शोषणकर्ताओं के कुकृत्यों की ओर संकेत करना चाहा है। आज जीवन के सभी क्षेत्रों में शोषणकर्ताओं का बोलबाला है जिनके चंगुल से आम आदमी का बच पाना कठिन है।
प्रश्न 8.
कवि को माँ की याद कब आई और क्यों?
उत्तर-
यमराज को घर का पता जानने के लिए जब कवि दूर-दूर तक गया तब उसे दक्षिण के वास्तविक खतरों का अनुभव हुआ तब उसे माँ की सीख की याद आई। यह याद उसे इसलिए आई क्योंकि माँ ने इन खतरों के प्रति उसे बचपन में ही आगाह करा दिया था।
प्रश्न 9.
आज यमराज का वास कहाँ-कहाँ दिखाई पड़ता है? वे वहाँ किस रूप में दिखाई देते हैं?
उत्तर-
आज यमराज का वास केवल दक्षिण दिशा में ही न होकर हर दिशा में दिखाई पड़ता है। यमराज शोषणकारी शक्तियों और शोषणकर्ताओं को कहा गया है। ये दूसरों का शोषण करके, उनके हक छीनकर शक्तिशाली हो गए हैं। वे आलीशान महलों में रहते हैं। वे क्रोध, घृणा, आक्रोश, हिंसा, क्रूरता भरी लाल आँखों से भयानक रूप में दिखाई देते हैं।
प्रश्न 10.
माँ द्वारा कवि को जो सीख दी गई, उसे उसने अक्षरशः क्यों मान लिया होगा? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
माँ द्वारा कवि को जो सीख दी गई उसे उसने अक्षरशः इसलिए मान लिया होगा क्योंकि कवि उस समय बच्चा था। कवि को माँ की सीख में अपनी भलाई नज़र आई होगी। इसके अलावा माँ ने यमराज को क्रोधित करने का संभावित परिणाम भी कवि को समझा दिया था।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कवि की माँ ने उसे जो सीख दी थी उसकी परिधि आज किस तरह विस्तृत हो गई है? ‘यमराज की दिशा’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
कवि की माँ ने कवि को सीख दी थी कि दक्षिण की ओर पैर करके मत सोना। दक्षिण दिशा में यमराज रहता है। वह मृत्यु का देवता है। उसे क्रुद्ध करना बुद्धिमानी की बात नहीं क्योंकि इससे जान का खतरा हो सकता है। तब कवि बच्चा था। उसने माँ की सीख मानकर दक्षिण दिशा में पैर करके नहीं सोया।
माँ ने कवि को बताया था कि यमराज रूपी शोषणकारी शक्तियाँ दक्षिण में रहती हैं परंतु कवि ने बाद में देखा कि अब तो यमराज का घर केवल दक्षिण में ही नहीं, बल्कि हर दिशा में है। उनके आलीशान महल कहीं भी देखे जा सकते हैं। वे क्रूरता से लोगों का शोषण करने को तैयार हैं। इस प्रकार माँ द्वारा दी गई सीख की परिधि विस्तृत हो गई।

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